चेतन आनंद : हम नहीं शाख, न पत्ते ही, न फल जैसे हैं

चेतन आनंद : हम नहीं शाख, न पत्ते ही, न फल जैसे हैं Chetan anand Hindi Gazal: Ham nahi shaakh n patte hi n Fal jaise hai

हम नहीं शाख, न पत्ते ही, न फल जैसे हैं

प्यार की झील में हम नीलकमल जैसे हैं।


 

उनमें कुछ और ही बातों का असर आया है

वो न अब आज के जैसे हैं, न कल जैसे हैं।

 

सांस की डायरी में आज सजा लो हमको

हम भी इक शोख, नई, ताज़ा ग़ज़ल जैसे हैं।

 

द्वार की सीढ़ियां वो उनकी बहुत ऊंची हैं

इस तरफ आइये ये घर भी महल जैसे हैं।


 

इतनी ऊंचाइयां न आज हमें दो यारो

सिर्फ गुज़रे हुए हम वक़्त के पल जैसे हैं।

 


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