चेतन आनंद : इन सियासतदानों के घर में भी ठोकर मारकर

Chetan anand Hindi Gazal In siyasatdano ke ghar mai bhi thokar markar

इन सियासतदानों के घर में भी ठोकर मारकर,

क्या मिलेगा बेवजह कीचड़ में पत्थर मारकर।


 

तोड़ लो जितना इन्हें, ये सच ही बोलेंगे सदा,

खुद ख़ता खा लोगे, आईने में टक्कर मारकर।

 

दिल बिना भी आंख में आंसू तो आएंगे ज़रूर,

किस तरह रोकोगे नदियों को समंदर मारकर।

 

कौन कहता है ज़माने की नहीं सुनते हैं हम,

मुस्कुराना भी पड़ा है दिल को अक्सर मारकर।


 

बोलिये अब बात उनकी किस तरह मैं मान लूं,

वो तो कहते हैं चलो लेकिन मुक़द्दर मारकर।

 


 

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