चेतन आनंद : कभी रहे हम भीड़ में भइया, कभी रहे तन्हाई में,

Chetan anand Hindi Gazal kabhi rahe ham bheed mai bhaiya kabhi rahe tanhai mai

कभी रहे हम भीड़ में भइया, कभी रहे तन्हाई में,

सारी उम्र गुज़ारी हमने रिश्तों की तुरपाई में।


 

कभी बांसुरी को समझाया, ढपली के रोके आंसू,

कभी संभाला तबले को तो कभी हंसे शहनाई में।

 

बेटे जैसी बेटी पाली, पत्नी-मां के संग रहे,

कुछ से तो नुकसान उठाया, लगे रहे भरपाई में।

 

बाबू जी के संस्कार थे, इसीलिये हम मौन रहे,

दुनिया ने तो कोशिश की, झगड़े हों भाई-भाई में।


 

बाबू जी ने सिखलाया था, हाथ कभी मत फैलाना,

बरक़त बहुत-बहुत होती है, अपनी नेक कमाई में।

 


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Title: chetan anand hindi gazal kabhi rahe ham bheed mai bhaiya kabhi rahe tanhai mai in Hindi  | In Category: गजल ghazal

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