चेतन आनंद : मुश्क़िल है, मुश्क़िलात की तह तक नहीं जाती

Chetan anand Hindi Gazal Mushqil hai mushqilaat kit ah taq nahi jaati

मुश्क़िल है, मुश्क़िलात की तह तक नहीं जाती

कोई भी बात, बात की तह तक नहीं जाती।


 

जलता है ख़ूब आग में, वो जानती है, पर-

सूरज की बात, रात की तह तक नहीं जाती।

 

जाती है रोज़ ज़िन्दगी ही मौत की ज़द में,

क्यों मौत इस हयात की तह तक नहीं जाती।

 

जीते भी किस तरह से वो शतरंज की बाज़ी,

उसकी तो शह भी मात की तह तक नहीं जाती।


 

बेबस के क़त्ल की भला, परतें खुलेंगीं क्या,

तफ्तीश वारदात की तह तक नहीं जाती।

 


 

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