चेतन आनंद : पहले तो होते थे केवल काले, नीले, पीले दिन

Chetan anand Hindi Gazal Pahle to hote the kaval kale neele peele din

पहले तो होते थे केवल काले, नीले, पीले दिन,

हमने ही तो कर डाले हैं अब सारे ज़हरीले दिन।


 

मां देती थी दूध-कटोरी, पिता डांट के सँग टाॅफी,

बड़े हुए तो दूर हो गये मस्ती भरे रसीले दिन।

 

दिन की ख़ातिर रातें रोतीं आंखें भर-भरके आँसू,

लेकिन पत्थर बने हुए हैं निष्ठुर और हठीले दिन।

 

कुदरत की गरदन पर आरे, वृक्ष हैं कटते रोज़ाना,

कोयल-गौरैया सब रूठीं, सिमटे आज सुरीले दिन।


 

पंछी क्या रूठे, सूरज भी गुस्सा रोज़ दिखाता है,

उसने तहस-नहस कर डाले देखो छैल-छबीले दिन।

 


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