चेतन आनंद : प्यार कब आगे बढ़ा तक़रार से रहकर अलग

Chetan anand Hindi Gazal Pyar kab aage badha takrar se rahkar alag

प्यार कब आगे बढ़ा तक़रार से रहकर अलग,

सीढ़ियां बनती नहीं दीवार से रहकर अलग।


 

रुक गये तो मौत के आग़ोश में आ जाओगे,

सांस चलती ही नहीं रफ़्तार से रहकर अलग।

 

नफ़रतें ही नफ़रतें, बस उलझनें ही उलझनें,

ज़िन्दगी में ये मिला है प्यार से रहकर अलग।

 

लोग सब हैरान, मुझसे पूछते हैं आजकल,

तुम ख़बर कैसे बने अख़बार से रहकर अलग।


 

ज़िन्दगी में हौसला रखिये, इसे मत छोड़िये,

नाव आखि़र कब चली पतवार से रहकर अलग।

 


 

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