गुलजार की नज्म: अलाव

Gulzar ki nazam Alaaw in hindi

रात भर सर्द हवा चलती रही

रात भर हमने


अलाव तापा

मैंने माज़ी से कई ख़ुश्क सी शाख़ें काटीं

तुमने भी गुज़रे हुए लम्हों के पत्ते तोड़े

मैंने जेबों से निकालीं सभी सूखी नज़्में

तुमने भी हाथों से मुरझाए हुए ख़त खोले

अपनी इन आँखों से मैंने कई मांजे तोड़े

और हाथों से कई बासी लकीरें फेंकीं

तुमने पलकों पे नमी सूख गई थी सो गिरा दी

रात भर जो मिला उगते बदन पर हमको


काट के डाल दिया जलते अलाव में उसे

रात भर फूंकों से हर लौ को जगाये रखा

और दो जिस्मों के ईंधन को जलाये रखा

रात भर बुझते हुए रिश्ते को तापा हमने


 

 


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Title: gulzar ki nazam alaaw in hindi in Hindi  | In Category: गजल ghazal

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