जां निसार अख्तर की गजल: ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं

Hindi Gazal Jaan Nisar Akhtar, Ee Dard-E-Ishq Tujhse Mukarne Laga Hanu mai

ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं

मुझको सँभाल हद से गुज़रने लगा हूँ मैं


पहले हक़ीक़तों ही से मतलब था, और अब

एक-आध बात फ़र्ज़ भी करने लगा हूँ मैं

हर आन टूटते ये अक़ीदों के सिलसिले

लगता है जैसे आज बिखरने लगा हूँ मैं

ऐ चश्म-ए-यार ! मेरा सुधरना मुहाल था

तेरा कमाल है कि सुधरने लगा हूँ मैं

ये मेहर-ओ-माह, अर्ज़-ओ-समा मुझमें खो गये

इक कायनात बन के उभरने लगा हूँ मैं

इतनों का प्यार मुझसे सँभाला न जायेगा !


लोगो ! तुम्हारे प्यार से डरने लगा हूँ मैं

दिल्ली ! कहाँ गयीं तिरे कूचों की रौनक़ें

गलियों से सर झुका के गुज़रने लगा हूँ मैं

 


 

 


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Title: hindi gazal jaan nisar akhtar ee dard e ishq tujhse mukarne laga hanu mai in Hindi  | In Category: गजल ghazal

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