जां निसार अख्तर की गजल: इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं

Hindi Gazal Jaan Nisar Akhtar, Ishi Sabab Se Hai Shyad Ajaab Jitne Hai

इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं

झटक के फेंक दो पलकों पे ख़्वाब जितने हैं


वतन से इश्क़, ग़रीबी से बैर, अम्न से प्यार

सभी ने ओढ़ रखे हैं नक़ाब जितने हैं

समझ सके तो समझ ज़िन्दगी की उलझन को

सवाल उतने नहीं है, जवाब जितने हैं

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Title: hindi gazal jaan nisar akhtar ishi sabab se hai shyad ajaab jitne hai in Hindi  | In Category: गजल ghazal

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