जां निसार अख्तर की गजल: लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं

Hindi Gazal Jaan Nisar Akhtar, Lamha Lamha Tiri Yande Jo Chamak Uthati Hain

लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं

ऐसा लगता है कि उड़ते हुए पल जलते हैं


मेरे ख़्वाबों में कोई लाश उभर आती है

बन्द आँखों में कई ताजमहल जलते हैं

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