कैफ़ी आज़मी की गजल :  शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा

Kafi azami gazal -shor parindo ne unh hi n machaya hoga

शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा

कोई जंगल की तरफ़ शहर से आया होगा


पेड़ के कांटने वालो को ये मालूम तो था

जिस्म जल जायंगे जब सर पे न साया होगा

मानिए जश्न-ऐ-बहार ने ये सोचा भी नहीं

किसने कांटो को लहू पाना पिलाया होगा

अपने जंगल से घबरा के उडे थे जो प्यासे

हर सेहरा उनको समंदर नज़र आया होगा

बिजली के तार पे बैठा तनहा पंछी

सोचता है की यह जंगल तो पराया होगा


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Title: kafi azami gazal shor parindo ne unh hi n machaya hoga in Hindi  | In Category: गजल ghazal

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