आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई

आँसुओं में भीग जाने की हवस पूरी हुई

आ रही है जिस्म की दीवार गिरने की सदा

इक अजब ख़्वाहिश थी जो अब के बरस पूरी हुई

इस ख़िज़ाँ-आसार लम्हे की हिकायत है यही

इक गुल-ना-आफ़्रीदा की हवस पूरी हुई

आग के शो’लों से सारा शहर रौशन हो गया

हो मुबारक आरज़ू-ए-ख़ार-ओ-ख़स पूरी हुई

कैसी दस्तक थी कि दरवाज़े मुक़फ़्फ़ल हो गए

और इस के साथ रूदाद-ए-क़फ़स पूरी हुई

-शहरयार

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें