पप्पू की दुल्हन : कैलाश गौतम

Kailash Gautam ki kavita Pappu ki dulhan

हमारे पड़ोस में एक नयी नयी बहू आई. गर्मी के दिन थे, एक दिन छत पर से उसकी आवाज़ आई – अम्मा जी ! बाबू जी की खटिया मैंने खड़ी कर दी, आपकी भी कर दूँ ?. दरअसल उसका आशय था, छत पर बिछी चारपाइयों के खड़ा करने से, लेकिन उसमें से जो ध्वन्यार्थ निकलता है, उसको मैंने अपनी कविता का विषय बनाया. अब आप कविता सुनें..

 


पप्पू के दुल्हिन की चर्चा कालोनी के घर घर में,

पप्पू के दुल्हिन पप्पू के रखै अपने अंडर में

पप्पुवा इंटर फेल और दुलहिया बीए पास हौ भाई जी

औ पप्पू असू लद्धड़ नाही, एडवांस हौ भाई जी

कहे ससुर के पापा जी औ कहे सास के मम्मी जी

माई डियर कहे पप्पू के, पप्पू कहैं मुसम्मी जी

 

बहु सुरक्षा समीति बनउले हौ अपने कॉलोनी में

बहुतन के इ सबक सिखौले हौ अपने कॉलोनी में


औ कॉलोनी के कुल दुल्हनिया एके प्रेसिडेंट कहैली

और एकर कहना कुल मानेली एकर कहना तुरंत करैली

पप्पू के दुल्हिन के नक्शा कालोनी में हाई हौ

ढंग एकर बेढब हौ सबसे रंग एके रेक्जाई हो


 

औ कॉलोनी के बुढ़िया बुढ़वा दूरे से परनाम करैले

भीतरे भीतर सास डरैले भीतरे भीतर ससुर डरैले


दिन में सूट रात में मैक्सी, न घुंघटा न अँचरा जी

देख देख के हसै पड़ोसी मिसराइन औ मिसरा जी

अपने एक्को काम न छुए कुल पप्पुए से करवावैले

पप्पुओ जान गयेल हौ काहे माई डियर बोलावैले

 

के छूट गइल पप्पू के बीड़ी औ चौराहा छूट गइल

छूट गइल मंडली रात के ही ही हा हा छूट गइल

हरदम अप टू डेट रहैले मेकअप दोनों जून करैले

रोज बिहाने मलै चिरौंजी गाले पे निम्बुवा रगरै

पप्पू ओके का छेड़ीहै ऊ खुद छेड़ेले पप्पू के

जैइसे फेरे पान पनेरिन ऊ फेरेले पप्पू के

 

पप्पू के जेबा एक दिन लव लेटर ऊ पाई गइल

लव लेटर ऊ पाई गइल, पप्पू के शामत आई गइल

मुंह पर छीटा मारै उनके आधी रात जगावैले

इ लव लेटर केकर हउवे उनही से पढ़वावैले

लव लेटर के देखते पप्पुवा पहिले तो सोकताइ गइल

झपकी जैसे फिर से आइल पप्पुवा उहै गोहताई गइल

 

मेहर छीटा मारे फिर फिर पप्पुवा आँख न खोलत हौ

संकट में कुकरे के पिल्ला जैसे कूँ कूँ बोलत हौ

जैसे कत्तो घाव लगल हौ हाँफ़त औ कराहत हौ

इम्तहान के चिटइस चिटिया मुंह में घोंटल चाहत हौ

सहसा हँसे ठठाकर पप्पुवा फिर गुरेर के देखलस

अँधियारन में एक तीर ऊ खूब साधकर मरलस

 

अच्छा देखा एहर आवा बात सुना तू अइसन हउवे

लव लेटर लिखै के हमरे कॉलेज में कम्पटीसन हउवे

हमरो कहना मान मुसमिया रात आज के बीतै दे

सबसे बढ़िया लव लेटर पे पुरस्कार हौ, जीतै दे

 

 

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Title: kailash gautam ki kavita pappu ki dulhan in Hindi  | In Category: कविता kavita

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