• जनपद के गन्ना किसानों ने 91117 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना की खेती की थी
  • मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग की तरफ से गन्ना का सर्वे कराया गया
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गन्ना को भी शामिल किए जाने की मांग

कुशीनगर, 23 मार्च (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश सरकार के चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर किसानों के हित में संचालित योजनाओं पर भी ध्यान दिलाया जा रहा है, लेकिन बीते बरसात में अत्यधिक बारिश के चलते रेड राट रोग, उकठा रोग और सूखने से बर्बाद हुई 9330 हेक्टेयर गन्ना की फसल का मुआवजा अब तक किसानों को नहीं मिला।

हालांकि गन्ना विभाग की तरफ से इसका सर्वे कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच कराकर किसानों को मुआवजा दिलाने की बात कही थी, लेकिन बाद में इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। बीते बरसात में हुई अत्यधिक बारिश से गन्ना की फसल को सर्वाधिक नुकसान हुआ।

जनपद के गन्ना किसानों ने 91117 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना की खेती की थी, लेकिन अतिवृष्टि और खेतों में ज्यादा दिनों तक जलभराव हो जाने के चलते 0238 प्रजाति का गन्ना काफी मात्रा में या तो सूख गया या रेडराट रोग अथवा उकठा रोग का शिकार हो गया। पिछले कई वर्षों से जनपद में गन्ना का क्षेत्रफल बढ़ाने वाली यह प्रजाति किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हुई।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग की तरफ से गन्ना का सर्वे कराया गया और इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई, लेकिन पीड़ित किसानों को कुछ हासिल नहीं हुआ। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने पिछले सप्ताह भी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गन्ना को भी शामिल किए जाने की मांग की है।

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