स्वामी दयानंद सरस्वती उन्नीसवीं शताब्दी के महान समाज-सुधारकों में से एक थे, जिन्होंने भारत में बढ़ते हुए पाखंड और मूर्ति-पूजा जैसे विषयों पर अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए 1876 में हरिद्वार के कुंभ मेले के अवसर पर पाखण्डखंडिनी पताका फहराकर पोंगा-पंथियों को चुनौती दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने सुधारवादी […]