प्यार कब आगे बढ़ा तक़रार से रहकर अलग, सीढ़ियां बनती नहीं दीवार से रहकर अलग।   रुक गये तो मौत के आग़ोश में आ जाओगे, सांस चलती ही नहीं रफ़्तार से रहकर अलग।   नफ़रतें ही नफ़रतें, बस उलझनें ही उलझनें, ज़िन्दगी में ये मिला है प्यार से रहकर अलग। […]

आ गये रिश्तों का हम रंगीं दुशाला छोड़कर, अब कहां जाएंगे हम तेरा शिवाला छोड़कर।   कहकहे, सुख-चैन, सपने, नींद, आज़ादी के दिन, क्या मिलेंगे ये तुम्हें सच का उजाला छोड़कर।   शहर में दिन-रात रोटी के लिए तरसा है वो, जो कि गुस्से में गया घर से निवाला छोड़कर। […]

हम नहीं शाख, न पत्ते ही, न फल जैसे हैं प्यार की झील में हम नीलकमल जैसे हैं।   उनमें कुछ और ही बातों का असर आया है वो न अब आज के जैसे हैं, न कल जैसे हैं।   सांस की डायरी में आज सजा लो हमको हम भी […]

आंगन में तेरा अक्सर दीवार खड़ी करना कुछ अच्छा नहीं लगता तक़रार खड़ी करना।   सच ये है कि मुश्किल है दीवार खड़ी करना बस ख्वाब में आसां है मीनार खड़ी करना।   चल छोड़, भुला भी दे नफ़रत की कहानी को क्यों बात को बेमतलब हरबार खड़ी करना।   […]

हमारे हौसले अहसास की हद से बड़े होते अगर अपने नहीं होते तो हम क़द से बड़े होते।   हमें ही छू न पायीं भोर की किरणें शिकायत है नहीं तो हम भी शायद एक बरगद से बड़े होते।   हमारी ही कमी थी, हम ही घबराये रहे, वरना हमारे […]

उजाले की हुई पत्थर सरीखी पीर को तोड़ें उठो, उठकर अंधेरे की कड़ी प्राचीर को तोड़ें।   नहीं टूटी तो आंखों का समन्दर सूख जाएगा हृदय के पर्वतों से दर्द की तासीर को तोड़ें।   खुले माहौल की खुशबू पे हक़ हम सबका बनता है अगर हम दायरे के पांव […]

भूख के एहसास को शेरो-सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले चलो जो ग़ज़ल माशूक के जल्वों से वाक़िफ़ हो गयी उसको अब बेवा के माथे की शिकन तक ले चलो मुझको नज़्मो-ज़ब्त की तालीम देना बाद में पहले अपनी रहबरी को आचरन तक ले […]

ऐसा भी कोई तौर तरीका निकालिये। अहसास को अल्फाज़ के सांचे में ढालिये।।   जलता रहे जो रोज़ ही नफ़रत की आग में, ऐसा दिलो दिमाग़ में रिश्ता न पालिये।।   दीवार रच रही है बांटने की साजिशें, उठिये कि घर संभालिये, आंगन संभालिये।।   सोया है गहरी नींद में […]

वक़्त की सियासत के, क्या अजब झमेले हैं। आइने तो ग़ायब हैं, चेहरे अकेले हैं।।   अब बतायें क्या तुमकोa दोस्तों की साजिश ने उस तरफ के ग़म सारे इस तरफ धकेले हैं।।   रास्ते टटोले तो, रास्ते मिले, लेकिन तीरगी के सब नश्तर, उंगलियों ने झेले हैं।।   हम […]

गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी जो हैं उदास उनकी मुस्कान बनके जी।   गूंगी हुई है सरगम, घायल हैं साज़ सब, हर हाल में तू इनका सम्मान बनके जी।   जो मन को मुग्ध कर दे, हलचल मचा दे जो, ऐसी तू शंख-मुरली की तान बनके जी।   […]

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