सिर पर आग, पीठ पर पर्वत, पांव में जूते काठ के क्या कहने इस ठाठ के यह तस्वीर नई है भाई, आज़ादी के बाद की जितनी कीमत खेत की कल थी, उतनी कीमत खाद की सब धोबी के कुत्ते निकले, घर के हुए न घाट के क्या कहने इस ठाठ […]

हमारे पड़ोस में एक नयी नयी बहू आई. गर्मी के दिन थे, एक दिन छत पर से उसकी आवाज़ आई – अम्मा जी ! बाबू जी की खटिया मैंने खड़ी कर दी, आपकी भी कर दूँ ?. दरअसल उसका आशय था, छत पर बिछी चारपाइयों के खड़ा करने से, लेकिन […]

भक्ति के रंग में रंगल गाँव देखा, धरम में, करम में, सनल गाँव देखा. अगल में, बगल में सगल गाँव देखा, अमौसा नहाये चलल गाँव देखा.   एहू हाथे झोरा, ओहू हाथे झोरा, कान्ही पर बोरा, कपारे पर बोरा. कमरी में केहू, कथरी में केहू, रजाई में केहू, दुलाई में […]

गाँव गया था गाँव से भागा रामराज का हाल देखकर पंचायत की चाल देखकर आँगन में दीवाल देखकर सिर पर आती डाल देखकर नदी का पानी लाल देखकर और आँख में बाल देखकर गाँव गया था गाँव से भागा। गाँव गया था गाँव से भागा सरकारी स्कीम देखकर बालू में […]

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