भले डांट घर में तू बीबी की खाना भले जैसे -तैसे गिरस्ती चलाना भले जा के जंगल में धूनी रमाना मगर मेरे बेटे कचहरी न जाना   कचहरी न जाना कचहरी न जाना   कचहरी हमारी तुम्हारी नहीं है कहीं से कोई रिश्तेदारी नहीं है अहलमद से भी कोरी यारी […]

हमारे पड़ोस में एक नयी नयी बहू आई. गर्मी के दिन थे, एक दिन छत पर से उसकी आवाज़ आई – अम्मा जी ! बाबू जी की खटिया मैंने खड़ी कर दी, आपकी भी कर दूँ ?. दरअसल उसका आशय था, छत पर बिछी चारपाइयों के खड़ा करने से, लेकिन […]

जब देखो तब बड़की भौजी हँसती रहती है हँसती रहती है कामों में फँसती रहती है । झरझर झरझर हँसी होंठ पर झरती रहती है घर का खाली कोना भौजी भरती रहती है ।।   डोरा देह कटोरा आँखें जिधर निकलती है बड़की भौजी की ही घंटों चर्चा चलती है […]

भक्ति के रंग में रंगल गाँव देखा, धरम में, करम में, सनल गाँव देखा. अगल में, बगल में सगल गाँव देखा, अमौसा नहाये चलल गाँव देखा.   एहू हाथे झोरा, ओहू हाथे झोरा, कान्ही पर बोरा, कपारे पर बोरा. कमरी में केहू, कथरी में केहू, रजाई में केहू, दुलाई में […]

गाँव गया था गाँव से भागा रामराज का हाल देखकर पंचायत की चाल देखकर आँगन में दीवाल देखकर सिर पर आती डाल देखकर नदी का पानी लाल देखकर और आँख में बाल देखकर गाँव गया था गाँव से भागा। गाँव गया था गाँव से भागा सरकारी स्कीम देखकर बालू में […]