आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है आज की रात न फुटपाथ पे नींद आयेगी । सब उठो, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी उठो कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जायेगी । ये ज़मीं तब भी निगल लेने पे आमादा थी पाँव जब टूटती शाखों से […]

राम बन-बास से जब लौट के घर में आए याद जंगल बहुत आया जो नगर में आए रक़्स-ए-दीवानगी आँगन में जो देखा होगा छे दिसम्बर को श्री राम ने सोचा होगा इतने दीवाने कहाँ से मिरे घर में आए जगमगाते थे जहाँ राम के क़दमों के निशाँ प्यार की काहकशाँ […]