घर में ठन्डे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है बताओ कैसे लिख दूं धूप फागुन की नशीली है बगावत के कमल खिलते हैं दिल के सूखे दरिया में मैं जब भी देखता हूँ आँख बच्चों की पनीली है सुलगते ज़िस्म की गर्मी का फिर अहसास हो कैसे मोहब्बत की कहानी […]

जो उलझ कर रह गयी है फाइलों के जाल में गाँव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गयी राम सुधि की झौपड़ी सरपंच की चौपाल में खेत जो सीलिंग के थे सब चक में शामिल हो गए हम को पट्टे की […]

बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को, भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को । सब्र की इक हद भी होती है तवज्जो दीजिए, गर्म रक्खें कब तलक नारों से दस्तरख़्वान को । शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून, पेट के भूगोल में उलझे हुए […]

ज़ुल्फ़-अंगडाई-तबस्सुम-चाँद-आईना-गुलाब भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इनका शबाब पेट के भूगोल में उलझा हुआ है आदमी इस अहद में किसको फुर्सत है पढ़े दिल की क़िताब इस सदी की तिश्नगी का ज़ख़्म होंठों पर लिए बेयक़ीनी के सफ़र में ज़िंदगी है इक अजाब डाल पर मज़हब की पैहम खिल […]

जो उलझ कर रह गई है फाइलों के जाल में गाँव तक वो रोशनी आएगी कितने साल में बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गई रमसुधी की झोंपड़ी सरपंच की चौपाल में खेत जो सीलिंग के थे सब चक में शामिल हो गए हमको पट्टे की सनद मिलती […]

विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्यास लिखा है। बूढ़े बरगद के वल्कल पर सदियों का इतिहास लिखा है।। क्रूर नियति ने इसकी किस्मत से कैसा खिलवाड़ किया। मन के पृष्ठों पर शकुंतला अधरों पर संत्रास लिखा है।। छाया मंदिर महकती रहती गोया तुलसी की चौपाई लेकिन स्वप्निल, स्मृतियों […]

घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है। बताओ कैसे लिख दूँ धूप फाल्गुन की नशीली है।। भटकती है हमारे गाँव में गूँगी भिखारन-सी। सुबह से फरवरी बीमार पत्नी से भी पीली है।। बग़ावत के कमल खिलते हैं दिल की सूखी दरिया में। मैं जब भी देखता हूँ आँख […]

 फूल तितली झील झरने चाँद तारे रख दिए मेरी दो आँखों में उसने सब नज़ारे रख दिए। मानता हूँ ज़िन्दगी की गोद तो मेरी ही थी हाँ मगर इस गोद में सपने तुम्हारे रख दिए। उसकी ख़ातिर उसके दरवाज़े पे अपना दिल रखाए प्यार तो रक्खा ही रक्खाए सुख भी […]

झांके है कोई पलपल अहसास की नदी में, होने लगी है हलचल अहसास की नदी में।   पानी में जब वो झांके, चांदी-सी चमकी जैसे, उतरा हो जैसे बादल अहसास की नदी में।   महके हैं लफ्ज़ सारे, घोला है जैसे तुमने, खुशबू का कोई काजल अहसास की नदी में। […]

अहसास का फलक़ है, अल्फाज़ की ज़मीं है, लगता है मेरे दिल को, तू भी यहीं-कहीं है।   जब से किया है मैने, तेरे हवाले ख़ुद को, दुनिया में दिल ये मेरा, लगता कहीं-नहीं है।   गहरी नदी है, टूटी है नाव मेरी, लेकिन मुझको बचा तू लेगा, तुझपे मुझे […]

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