याद आते हैं हमें जब चंद चेहरे देरतक हम उतर जाते हैं गहरे और गहरे देरतक।   चांदनी आंगन में टहली भी तो दो पल के लिये धूप के साये अगर आये तो ठहरे देरतक।   बंदिशें दलदल पे मुमकिन ही नहीं जो लग सकें रेत की ही प्यास पर […]

ख़मोशियां ही ख़मोशियां हैं हमारे दिल में तुम्हारे दिल में। उदासियां ही उदासियां हैं हमारे दिल में तुम्हारे दिल में।।   हमें यक़ीं हैं गिरा ही लेंगीं ये नफरतों के दरख़्त सारे, दबी-दबी-सी जो आंधियां हैं हमारे दिल में तुम्हारे दिल में।।   ये पूरी दुनिया भी इक नदी है […]

बनके आई जो दुल्हन उस खुशी के चर्चे हैं। वक़्त के कहारों के पालकी के चर्चे हैं।।   सुन लिया है लोगों ने आ रहे हो तुम जबसे तबसे बस मुहल्ले में चांदनी के चर्चे हैं।।   नैन-नैन दिखना तुम सांस-सांस भी रहना आजकल मेरे घर में ज़िन्दगी के चर्चे […]

जिसके सम्मोहन में पागल धरती है आकाश भी है एक पहेली-सी दुनिया ये गल्प भी है इतिहास भी है चिंतन के सोपान पे चढ़ कर चाँद-सितारे छू आये लेकिन मन की गहराई में माटी की बू-बास भी है मानवमन के द्वन्द्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे ‘महारास’ की पृष्ट-भूमि […]

आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है ज़िन्दगी हम ग़रीबों की नज़र में इक क़हर है ज़िन्दगी भुखमरी की धूप में कुम्हला गई अस्मत की बेल मौत के लम्हात से भी तल्ख़तर है ज़िन्दगी डाल पर मज़हब की पैहम खिल रहे दंगों के फूल ख़्वाब के साये में फिर भी बेख़बर […]

Adam Gondvi Hindi Gazal: N Mahalo ki bulandi se N lafzo ke Nageene se ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में मुसल्सल फ़न का दम घुटता है इन अदबी इदारों में न इन में वो कशिश होगी , न बू होगी , न रआनाई खिलेंगे फूल बेशक […]

चाँद है ज़ेरे क़दम. सूरज खिलौना हो गया हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया शहर के दंगों में जब भी मुफलिसों के घर जले कोठियों की लॉन का मंज़र सलौना हो गया ढो रहा है आदमी काँधे पे ख़ुद अपनी सलीब ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा जब बोझ ढोना […]

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से कि अब मर्क़ज़ में रोटी है,मुहब्बत हाशिये पर है उतर आई ग़ज़ल इस दौर मेंकोठी के ज़ीने से अदब का आइना उन तंग गलियों से गुज़रता है जहाँ बचपन सिसकता है […]

वेद में जिनका हवाला हाशिये पर भी नहीं वे अभागे आस्था विश्वास लेकर क्या करें लोकरंजन हो जहां शम्बूक-वध की आड़ में उस व्यवस्था का घृणित इतिहास लेकर क्या करें कितना प्रतिगामी रहा भोगे हुए क्षण का इतिहास त्रासदी, कुंठा, घुटन, संत्रास लेकर क्या करें बुद्धिजीवी के यहाँ सूखे का […]

काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में   पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में   आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में   पैसे से […]

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