हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है ये तर्ज़, ये अन्दाज-ए-सुख़न हमसे चला है अरमान हमें एक रहा हो तो कहें भी क्या जाने, ये दिल कितनी चिताओं में जला है अब जैसा भी चाहें जिसे हालात बना दें है यूँ कि कोई शख़्स बुरा है, न भला […]

इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं झटक के फेंक दो पलकों पे ख़्वाब जितने हैं वतन से इश्क़, ग़रीबी से बैर, अम्न से प्यार सभी ने ओढ़ रखे हैं नक़ाब जितने हैं समझ सके तो समझ ज़िन्दगी की उलझन को सवाल उतने नहीं है, जवाब जितने हैं

ज़रा-सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर की तरह अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था मुआफ़ कर न सकी मेरी ज़िन्दगी मुझको वो एक लम्हा कि मैं तुझसे तंग आया था शिगुफ़्ता फूल सिमट […]

ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं मुझको सँभाल हद से गुज़रने लगा हूँ मैं पहले हक़ीक़तों ही से मतलब था, और अब एक-आध बात फ़र्ज़ भी करने लगा हूँ मैं हर आन टूटते ये अक़ीदों के सिलसिले लगता है जैसे आज बिखरने लगा हूँ मैं ऐ चश्म-ए-यार ! मेरा […]

लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं ऐसा लगता है कि उड़ते हुए पल जलते हैं मेरे ख़्वाबों में कोई लाश उभर आती है बन्द आँखों में कई ताजमहल जलते हैं

बहिन आज फूली समाती न मन में । तड़ित आज फूली समाती न घन में ।। घटा है न झूली समाती गगन में । लता आज फूली समाती न बन में ।। कही राखियाँ है, चमक है कहीं पर, कही बूँद है, पुष्प प्यारे खिले हैं । ये आयी है […]

Jallianwala bagh mein basant subhadra kumari chauhan यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे। परिमल-हीन पराग दाग़ सा बना पड़ा है, हा! यह प्यारा बाग़ खून से सना […]

Karmveer Poem -Ayodhya Singh Upadhyay ~ कर्मवीर – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध   देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं। रह भरोसे भाग के दुख भोग पछताते नहीं। काम कितना ही कठिन हो किन्तु उकताते नहीं। भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं। हो गये एक आन में […]

साजन! होली आई है! सुख से हँसना जी भर गाना मस्ती से मन को बहलाना पर्व हो गया आज- साजन ! होली आई है! हँसाने हमको आई है! साजन! होली आई है! इसी बहाने क्षण भर गा लें दुखमय जीवन को बहला लें ले मस्ती की आग- साजन! होली आई […]

ज़िन्दगी ये तो नहीं, तुझको सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हमने तिरा क़र्ज़ उतारा ही न हो कू-ए-क़ातिल की बड़ी धूम है चलकर देखें क्या ख़बर, कूचा-ए-दिलदार से प्यारा ही न हो दिल को छू जाती है यूँ रात की आवाज़ कभी चौंक उठता हूँ कहीं तूने पुकारा […]

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