Premchand Story : Mata Ka Hriday : माँ का ह्रदय नामक कहानी बेहद ही मार्मिक है। इस कहानी के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद से एक गरीब माँ की व्यथा को ज़ाहिर किया है। गरीबी के उस हाल में जब उसके पास दो जून की रोटी भी न होती थी उसने […]

लैला: प्रेमचंद | Laila : Premchand’s Hindi story: मुंशी प्रेमचंद ने लैला को जिसके गीत सुन कोई भी मन्त्र मुग्ध हो जाता था अपनी कहानी का मुख्य पात्र चुना। एक दिन जब शहजादा नादिर ने लैला को गाते हुए सुना तो वो खुद को उसके समक्ष जाने से रोक न […]

Nirvaasan Munshi Premchand ki Kahani : कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद ने समाज में महिलाओं की स्थिति और उनको लेकर बनाये गए नजरिये पर जमकर प्रहार किया है जिसका सटीक उदहारण उनकी कहानी निर्वासन (Nirvaasan) में पढने के लिए मिलता है। कहानी के माध्यम से पुरुष का एक महिला को […]

सेठ लगनदास जी के जीवन की बगिया फलहीन थी। कोई ऐसा मानवीय, आध्यात्मिक या चिकित्सात्मक प्रयत्न न था जो उन्होंने न किया हो। यों शादी में एक पत्नीव्रत के कायल थे मगर जरुरत और आग्रह से विवश होकर एक-दो नहीं पॉँच शादियॉँ कीं, यहॉँ तक कि उम्र के चालीस साल […]

मिलाप: प्रेमचंद की कहानी | Milaap hindi story by Munshi Premchand लाला ज्ञानचन्द बैठे हुए हिसाब–किताब जाँच रहे थे कि उनके सुपुत्र बाबू नानकचन्द आये और बोले- दादा, अब यहां पड़े –पड़े जी उसता गया, आपकी आज्ञा हो तो मौ सैर को निकल जाऊं दो एक महीने में लौट आऊँगा। […]

कफन: मुंशी प्रेमचंद Munshi premchand story kafan in hindi झोंपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीवी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देनेवाली आवाज निकलती […]

प्रात:काल था। आषढ़ का पहला दौंगड़ा निकल गया था। कीट-पतंग चारों तरफ रेंगते दिखायी देते थे। तिलोत्तमा ने वाटिका की ओर देखा तो वृक्ष और पौधे ऐसे निखर गये थे जैसे साबुन से मैने कपड़े निखर जाते हैं। उन पर एक विचित्र आध्यात्मिक शोभा छायी हुई थी मानों योगीवर आनंद […]

भानु चौधरी अपने गॉँव के मुखिया थे। गॉँव में उनका बड़ा मान था। दारोगा जी उन्हें टाटा बिना जमीन पर न बैठने देते। मुखिया साहब को ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मर्जी बिना गॉँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। कोई घटना, चाहे, वह सास-बहु का […]

बाबू ब्रजनाथ कानून पढ़ने में मग्न थे, और उनके दोनों बच्चे लड़ाई करने में। श्यामा चिल्लाती, कि मुन्नू मेरी गुड़िया नहीं देता। मुन्नु रोता था कि श्यामा ने मेरी मिठाई खा ली। ब्रजनाथ ने क्रुद्घ हो कर भामा से कहा—तुम इन दुष्टों को यहॉँ से हटाती हो कि नहीं? नहीं […]

Bade Ghar ki Beti (बड़े घर की बेटी) हिंदी के प्रख्यात कथाकार मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) की कहानी है। इस कहानी में प्रेमचंद जी ने संयुक्त परिवारों में होने वाली कलहों, समस्याओं और जरा जरा सी बातों के बतगंड बन जाने को बड़ी सुंदरता से दर्शाया है। बड़े घर की […]

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