मेरी पाँच बरस की लड़की मिनी से घड़ीभर भी बोले बिना नहीं रहा जाता। एक दिन वह सवेरे-सवेरे ही बोली, “बाबूजी, रामदयाल दरबान है न, वह ‘काक’ को ‘कौआ’ कहता है। वह कुछ जानता नहीं न, बाबूजी।” मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने दूसरी बात छेड़ दी। “देखो, बाबूजी, […]

Famous writer Jawahar Goyal Ki Hindi story: Habeeb ka Ghar हम सबको उस दिन भी क्रिकेट खेलना था। क्योंकि वह छुटटी का दिन था। फिर हबीब मियां का फरमान था कि स्कूल टीम को रोज अभ्यास करना जरूरी है। लेकिन कप्तान के कहने के बावजूद हम लोगों ने मैदान देर […]

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