नई दिल्ली, 01 फरवरी (एजेंसी)। पूर्वी दिल्ली प्रश्न का जवाब न देने पर दो छात्राओं को थप्पड़ मारने वाली शिक्षिका को कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोषी करार दिया है। इस मामले में सजा पर छह फरवरी को सुनवाई होगी।

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मंडावली इलाके के मयूर पब्लिक स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ने वाली दो छात्राओं ने आरोप लगाया था कि आठ अगस्त 2014 को सामाजिक विज्ञान की कक्षा में प्रश्न का जवाब न देने पर शिक्षिका शकुंतला नेगी उनके गाल पर कई थप्पड़ मारे थे। इस संबंध में शिक्षिका के खिलाफ मंडावली थाने में जानबूझ कर पिटाई करने और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 23 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित शिक्षिका ने पक्ष रखा था कि उसे झूठे मुकदमे में फंसाया गया है।

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स्कूल प्रशासन उसे गैर कानूनी तरह से हटाना चाहता था। वहीं, छात्राओं ने कोर्ट को बताया था शिक्षिका ने उनको पीटा। इस संबंध में स्कूल को शिकायत करने पर शिक्षिका ने माफी मांगी थी। साक्ष्य के तौर पर यह माफीनामा कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद महानगर दंडाधिकारी की कोर्ट ने शिक्षिका को जानबूझ कर छात्राओं की पिटाई करने और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत दोषी माना है। इस मामले में सजा पर छह फरवरी को सुनवाई होगी।

आइपीसी की धारा 323 के तहत जानबूझ कर किसी को चोट पहुंचाने के मामले में एक वर्ष तक कारावास या एक हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों की सजा सनाई जा सकती है। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत छह माह तक का कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है।

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