कल मुंबई स्थित एक मित्र ने बताया कि वे एक मराठी ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के साथ काम करने लगी हैं. इसे हाल में ही सिर्फ़ मराठी फ़िल्मों के लिए शुरू किया गया है. माधुरी दीक्षित इसकी ब्राण्ड एम्बसडर हैं.

सुना है कि मशहूर थिएटर चेन चलने वाले पीवीआर पिक्चर्स भी अपना एक अलग ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म लाने की सोच रहे हैं. एक ख़बर के मुताबिक़, अमरीकी स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म नेटफ़्लिक्स अगले साल सिर्फ़ नई सिरीज़ और नई फ़िल्मों के प्रोडक्शन पर ही दस से पंद्रह अरब डॉलर ख़र्च कर सकती है. एक और विदेशी स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म एमजॉन प्राइम के बारे में भी ख़बरें हैं कि वह भी आने वाले समय में नए कंटेंट पर काफ़ी मोटी रक़म ख़र्च करने वाली है. कोरोना काल ने जहाँ ज़्यादातर धंधे में मंदी ला दी है, स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म के धंधे में ज़ोरदार चमक दिखी है. लोगों के पास उपलब्ध ज़्यादा वक़्त और मनोरंजन की ज़रूरत ने इनके व्यापार को कई गुना बढ़ा दिया है. हाल में ही नामी फ़िल्मकार प्रकाश झा के एक नए चर्चित सिरीज़ आश्रम को तीस करोड़ से अधिक लोगों ने देखा. ऐसा दावा स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म मैक्स प्लेयर कर रहा है जिस पर यह वेब सिरीज़ नौ हिस्सों में स्ट्रीम हुआ. इसी महीने प्रकाश झा इस वेब सिरीज़ के अगले हिस्से को जयपुर में शूट करने वाले हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ नेटफ़्लिक्स और एमजॉन प्राइम जैसी विदेशी स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म नए कंटेंट पर बेतहाशा पैसा लगा रही है. देसी स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म का भी वही हाल है. वे भी नए नए सिरीज़ और नई फ़िल्मों के लिए करोड़ों ख़र्च कर रहे हैं.

आज हिंदुस्तान में अलग अलग भाषाओं में देसी विदेशी क़रीब तीस ऐसे स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म हैं. इन सबमें अपनी ग्राहक संख्या बढ़ाने के लिए होड़ लगी है. मैक्स प्लेयर जैसे कुछ प्लेटफ़ॉर्म अभी भी फ़्री हैं. आगे इसकी योजना दर्शकों से फ़ीस बटोरने की है या नहीं, कह नहीं सकते. लगभग रोज़ घोषणाएँ हो रही हैं कि बॉलीवुड की नई नई फ़िल्में अब सीधे इन ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ होंगी. इनमें अक्षय कुमार, अजय देवगन जैसे बड़े सितारों की नई फ़िल्में तो हैं ही, कई छोटी फ़िल्में भी शामिल हैं जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में भी सिनेमाघरों में रिलीज़ करना एक मुश्किल काम है. बीते हफ़्ते एमजॉन प्राइम ने बक़ायदा विज्ञापन देकर घोषणा की वह आठ दस नई फ़िल्में सीधे अपने प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ करने वाला है.

दरअसल, फ़िल्म प्रोड्यूसरों के लिए भी यह अच्छा सौदा साबित हो रहा है. आजकल की बात ना करें, जब सिनेमाघर वैसे ही बंद हैं. सामान्य परिस्थिति में भी किसी भी फ़िल्म को सिनेमा घरों में रिलीज़ करना प्रोड्यूसर के लिए अतिरिक्त ख़र्चे का बोझ लाता है. फ़िल्म के प्रचार और सिनेमाघरों और डिस्ट्रीब्यूटरों के ख़र्च, कमीशन आदि पर लाखों, करोड़ों ख़र्च होते हैं. फ़िल्म चल गयी तो ठीक वरना यह ख़र्च प्रोड्यूसर को अपनी जेब से भरना पड़ता है. स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर अगर आपने सीधे अपनी फ़िल्म बेच दी तो बाक़ी झंझट से आप मुक्त हो गए और सीधे पैसे आपके अकाउंट में ट्रान्स्फ़र हो गए. हींग लगे ना फिटक़री रंग चोखा.

हाँ, पैसा ज़रूर फ़िल्म की हैसियत और फ़िल्म के स्टार की हैसियत के मुताबिक़ मिलता है. ख़बर है कि अक्षय कुमार की घटिया फ़िल्म लक्ष्मी बम के लिए हॉटस्टार ने सौ करोड़ के आसपास ख़र्च किए थे.. उसी तरह, अजय देवगन की नई घटिया फ़िल्म भुज के लिए भी काफ़ी मोटी रक़म दी गयी है.आपको मालूम ही होगा कि अक्षय कुमार ने एमजॉन प्राइम की एक वेब सिरीज़ में ऐक्टिंग करने के लिए भी हामी भरी है. अक्षय की फ़ीस ही सौ करोड़ से ऊपर की बताई जा रही है.

इसलिए, अचानक तो नहीं कहेंगे लेकिन पिछले कुछ समय से स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म या ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफ़ॉर्म अब सिनेमाघरों के क़द से बड़े दिखने/लगने लगे हैं. यानि इनका क़द बड़े परदे से भी बड़ा हो गया है. नतीजा यह हुआ है कि अब छोटा बड़ा कोई भी फ़िल्मकार इन्हें अछूत नहीं मान रहा. सब इनके लिए काम कर रहे हैं. जो नहीं कर रहे, वो करने की कोशिश में लगे हैं. इनके पास बजट है. इनके पास पैसा है. आप इसका अंदाज़ा सिर्फ़ इससे लगाएँ कि जहाँ टीवी सीरीयल का बजट अधिकतम पंद्रह से बीस लाख प्रति एपिसोड होता है, वेब सिरीज़ के एक एपिसोड का बजट पचास लाख से दो करोड़ रुपए प्रति एपिसोड तक होता है.

इन सब का नतीजा यह हुआ है कि सिनेमाघर वाले या मल्टीप्लेक्स वाले चिंता में हैं. उन्हें लगता है कि उनका धंधा कोरोना की वजह से पहले से ही मंदा था. स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म ने और कबाड़ा कर दिया है. जब बड़ी बड़ी फ़िल्में सीधे इन्हीं पर आ जाएँगी तो सिनेमा हॉल जाकर कौन फ़िल्में देखेगा ?

बात सही भी है. अभी तो ये हाल है कि सिर्फ़ वही बनी हुई तैयार बड़ी फ़िल्में स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म या ओटीटी पर रिलीज़ होने से परहेज़ कर रही हैं जिन्हें लगता है कि ओटीटी वाले जो पैसा इन्हें देंगे उनसे इनका ख़र्चा नहीं निकल पाएगा. इनमें रोहित शेट्टी , सलमान खान और रणबीर सिंह (83) की कुछ फ़िल्में हैं.

ये सब सिनेमाघरों के खुलने और सामान्य होने का इंतज़ार कर रहे हैं. हालाँकि सिनेमाघरों के खुलने के बाद भी वहाँ इतनी बंदिशें होंगी कि कितने लोग उन बंदिशों और मौजूदा डर के माहौल में वहाँ जाकर फ़िल्में देखेंगे और उनसे कितना बिज़नस होगा, यह देखने वाली बात है.
विदेशों में स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म ख़ासकर नेटफ़्लिक्स, बड़े फ़िल्मकारों को उनकी फ़िल्मों के प्रोडक्शन के लिए पैसे भी दे रहा है. उसने मार्टिन स्कोरसेसे जैसे बड़े फ़िल्मकार को द आइरिशमेन जैसी फ़िल्म के लिए करोड़ों का बजट दिया. ऐसी फ़िल्मों के सभी अधिकार फिर नेटफ़्लिक्स के पास होते हैं. फिर वही इन्हें जहाँ चाहे रिलीज़ करे. फ़िल्मकार का फिर अपनी फ़िल्म पर कोई व्यवसायिक नियंत्रण नहीं रह जाता. अमेरिका में स्टीवन स्पिलबर्ग जैसे बहुत बड़े नामों ने नेटफ़्लिक्स के इस एकाधिकार पूर्ण रवैए की कई मौक़ों पर कड़ी आलोचना की है और इसके बनाई फ़िल्मों को ऑस्कर अवार्ड की रेस से दूर रखने की इस आधार पर दूर रखने की वकालत की है कि जिस तरह टीवी फ़िल्मों को ऑस्कर नहीं दिया जाता, उसी तरह स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म की फ़िल्मों को भी ऑस्कर नहीं दिया जाना चाहिए. लेकिन उनके विरोध का कोई ख़ास असर नहीं हुआ है. हर साल अब नेटफ़्लिक्स के प्रोडक्शन वाली फ़िल्मों को ऑस्कर मिलने की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. नेटफ़्लिक्स ने अपने पाँव पूरी दुनिया में इस क़दर पसार लिए हैं कि यह लगभग हर मुल्क की अच्छी कहानियों को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर चाहता है. चाहे वे टीवी पर पहले ही चल चुकी हो.

इसने स्पेन के टीवी पर चल चुके एक सीरीयल का ना केवल अधिग्रहण किया बल्कि उसके अगले हिस्से को भी बनवाया जो मनी हायस्ट नाम से दुनिया भर में रिलीज़ हुआ और इसके सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले सिरीज़ में शामिल हुआ. हाल में इसने दस उन अपनी फ़िल्मों की सूची जारी की है जो नेटफ़्लिक्स पर सबसे ज़्यादा देखी गयी. उनमें एक्सट्रेक्शन, बर्ड बॉक्स जैसी फ़िल्में हैं जिन्हें दस करोड़ के आसपास लोगों ने देखा. अंदाज़ा लगाइए कि कितने लोग इन्हें देखते हैं और इनकी पहुँच कितनी ज़्यादा है. इनकी वेब सिरीज़ की व्यूअरशिप तो और ज़्यादा है.

इन्हीं सब वजहों से कुछ लोग भारत में सिनेमाघरों की मृत्यु की घोषणा भी करने लगे हैं. लेकिन निश्चित तौर पर ऐसा करना या ऐसा कहना ना केवल ग़लत है बल्कि बहुत जल्दबाज़ी भी है . ज़रा कोरोना काल निकल जाय. स्थितियाँ नॉर्मल हो जाएँ. और तब भी सिनेमाघरों जाने से से लोगबाग परहेज़ करें तो निश्चित तौर पर वह एक चिंताजनक स्थिति होगी. लेकिन भविष्य किसने देखा है . आगे क्या होगा, किसे ख़बर है? फ़िलहाल तो ये है कि जिन शहरों में सिनेमाघर खुले हैं, वहाँ दर्शक न के बराबर हैं.

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें