• कंपनियों के साथ  पारिस्थितिकी पर भरोसा तैयार करने में मदद मिलेगी
  • भारत में स्थानीय भाषाओं व सहायक लेनदेन जैसी सुविधाए एकीकृत
  • कोई भी ऐसी रुपरेखा नहीं चाहता, जो नवाचार को अवरुद्ध करता हो : मोहन

नई दिल्ली, 20 फरवरी (एजेंसी)। कंपनियों के अपनी रूपरेखा के बारे में अधिक पारदर्शी होने तथा लोगों को संवाद पर उन्हें अधिक नियंत्रण देने से जनता व कंपनियों के बीच तथा और साथ ही पारिस्थितिकी पर भरोसा तैयार करने में मदद मिलेगी। फेसबुक इंडिया के प्रबंध निदेशक अजीत मोहन ने शुक्रवार को यह कहा। इंफोसिस के सह संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन और ओमिदयार नेटवर्क इंडिया की प्रबंध निदेशक रूपा कुडवा ने भी कहा कि भारत में स्थानीय भाषाओं व सहायक लेनदेन जैसी सुविधाओं को एकीकृत करके बड़े मूल्यवान व्यवसाय बनाये जा सकते हैं।

नासकॉम के 29वें प्रौद्योगिकी व नेतृत्व फोरम (एनटीएलएफ) के अवसर पर ‘प्रौद्योगिकी में भरोसे को कैसे बनाये रखें’ विषय पर मोहन ने कहा कि कोई भी ऐसी रुपरेखा नहीं चाहता, जो नवाचार को अवरुद्ध करता हो।

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