• बंगाल और राजस्थान के मिठाई कारीगरों ने आने से कर दिया इनकार

  • मिठाई के ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं नहीं के बराबर

  • लोकडाउन के कारण सभी कारीगर पलायन कर गए

– रजत चांदीवाल, गाजियाबाद

लोक डाउन खुलने के बावजूद भी मिठाई और रेस्टोरेंट कारोबारियों की टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है। मिठाई कारोबारियों के यहां मिठाई बनाने वाले कारीगर नहीं है। जो थे वह सब पलायन कर गए, अब वापस आने का नाम नहीं ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर दुकान पर खरीदार भी नहीं आ पा रहे हैं। इस वजह से मिठाई कारोबारी परेशान हैं।
 गाजियाबाद में मिठाई और रेस्तरां के करीब 300 कारोबारी हैं। इनके यहां 10,000 से अधिक स्टाफ कार्य कर रहा था। मिठाई की अधिकांश दुकानों पर बंगाल और राजस्थान के कारीगर थे। कोरोनावायरस संक्रमण को मात देने के लिए सरकार ने 23 मार्च को समूचे देश में लोक डाउन लागू किया था। लोक डाउन के दौरान राजस्थान और बंगाल के करीब 80% कारीगर पलायन कर गए थे। शहर में अभी  मात्र 20% कारीगर ही शेष है।
सरकार ने हाल ही में मिठाई की दुकानों को सप्ताह में 6 दिन और रेस्तरां को मात्र 3 दिन खोले जाने की परमिशन दी है। मिठाई की दुकान और रेस्तरां प्रशासन द्वारा निर्धारित की गई शर्तों के  आधार पर 26 मई से खुल गई है।
मिठाई कारोबारियों का कहना है कि दुकानें तो खुल गई है, मगर दुकानों पर मिठाई तैयार करने वाले कारीगर और अन्य स्टाफ नहीं है। जो है वह मिठाई तैयार करने के लिए पर्याप्त नहीं है

राजस्थान और बंगाल के कारीगरों मैं आने से कर दिया इनकार

बंगाल और राजस्थान के मिठाई कारीगरों को वापस बुलाने के लिए दुकानदारों ने फोन के माध्यम से बात की है। मगर उन्होंने अभी आने से इंकार कर दिया है। इस कारण मिठाई और रेस्तरां कारोबारियों की टेंशन बढ़ गई है।

मिठाई के ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं नहीं के बराबर

मिठाई कारोबारियों का कहना है कि दुकानों पर मिठाई के खरीदारी के लिए बहुत कम ग्राहक आ रहे हैं ।ऑनलाइन ऑर्डर भी नहीं के बराबर मिल रहे हैं।

क्या कहना है मिठाई कारोबारियों का

आरडीसी स्थित मिठाई कारोबारी राहुल गोयल का कहना है कि कारीगरों के पलायन करने की वजह से मिठाई और रेस्तरां कारोबार चौपट हो गया है। जब तक कारोबारी वापस नहीं आएंगे तब तक कारोबार को रफ्तार नहीं दी जा सकेगी।
एसोसिएशन ऑफ फूड ऑपरेटर के कार्यालय सचिव केसरी मिश्रा का कहना है कि मिठाई में अधिकांश प्रोडक्ट दूध से बनते हैं। इन्हें बनाकर अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता। दूध से बनने वाले प्रोडक्ट को तैयार करने के लिए अच्छे कारीगरों की आवश्यकता होती है। अच्छे कारीगर बंगाल और राजस्थान से आते हैं। लोक डाउन के कारण सभी कारीगर पलायन कर गए। इस वजह से मिठाई कारोबारियों की दिक्कत बढ़ गई है।
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