बात 1961 की है। कंप्यूटर प्रोग्रमरों ने सोचा कि कंप्यूटर पर काम करते-करते आदमी थक जाता है इसलिए बीच में थोड़ा सा आराम देने के लिए कुछ खेल तैयार किए जाए। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में शोध के दौरान ए.एस.डगलस ने पहला ‘टीक टैक टो’ नामक कंप्यूटर खेल तैयार किया। इस बड़े ही रोचक तरीके से कंप्यूटर पर खेला जाता था। लेकिन यह खेल कठिन था। इसमें कंप्यूटर खेल की भाषा नहीं समझ सकता था। इसलिए उसे खेलने में कठिनाई होती थी। उस समय कंप्यूटर का उपयोग कुछ ही कामों के लिए किया जाता था। कंप्यूटर काफी महंगे भी थे। इसलिए लोगों को यह भय रहता था कि खेल के कारण कहीं कंप्यूटर खराब न हो जाएं।

उसी समय कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार करने वाले प्रोग्रामर स्टीव रसेल ने ‘स्पेस बार’ खेल तैयार किया। इस खेल में दो आदमी अंतरिक्ष में उड़ते थे और वे दोनों एक दूसरे को मारने के लिए शूट करते थे। लेकिन यह केवल शूट भर ही था उससे आदमी नहीं मरते थे। यह एक प्रकार से मनोरंजन का साधन था। बाद में स्टीव रसेल ने ‘स्पेस बार’ खेल को और विस्तार दिया और इस खेल का नाम रखा गया ‘आरकेड’ इस खेल में भी दो आदमी एक दूसरे पर प्रहार करते थे। लेकिन गोली किसी को नहीं लगती अगर गोली लगती तो प्वाइंट मिलता था।

इसके बाद 1974 में ‘होम पोंग’ नामक खेल शुरू हुआ था। जो टेनिस की तरह था। इस खेल को शुरू करने का श्रेय विलियम हिगिंबोथम को जाता है। जिन्होंने 1958 में पहली बार ‘टेनिस फार टू’ के नाम से वीडियो खेलों की शुरुआत की थी। उस समय के खेलों में हिंसा नहीं थी उसके बाद ‘कोलोसेल केव एडवेन्चर नामक खेल की शुरुआत हुई जो काफी रोचक था।

इस खेल में एक व्यक्ति गुफाओं के बीच घूम कर खजाने की तलाश करता है। रास्ते में उसे तरह तरह के जीव जन्तुओं से लड़ना पड़ता था। यह एक साहसिक खेल था जिसे चाव से खेला जाता था। यहीं से साहसिक खेलों की शुरुआत हुई। लेकिन इन खेलों को खेलने के लिए लिखी हुई भाषा का प्रयोग करना पड़ता था। मसलन अगर व्यक्ति को बाएं घूमना है तो ‘गो लेफ्ट’ लिखना पड़ता था। लेकिन इस खेल ने नए-नए एडवेंचर खेलों को जन्म दिया। इसके बाद ‘अंपायर’ खेल आया जो प्रथम विश्व युद्ध को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इस खेल में अजीबोगरीब नक्शे होते थे। इन नक्शों के जरिए सही जगह पहुंचना होता था।

70 के दशक में खेलों को लेकर हुए शोध से यह निष्कर्ष निकाला गया कि कंप्यूटर पर कभी न थकने वाले खेल तैयार किए जाएं इससे पहले जो खेल थे, वे एक निश्चित समय के लिए थे। यह योजना भी बनायी गयी कि अगर खेलों को थोड़ा जटिल बनाया जाए तो ज्यादा रोचकता आएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए 1984 में आईबीएम कंपनी ने एक खेल बनाया जिसका नाम था ‘किंग क्वेस्ट’।

यह खेल बहुत ही लोकप्रिय हुआ और काफी समय तक टाॅप पर रहा। इसमें भी एक व्यक्ति खजाने की खोज करता था। इसे संदुर तरीके से डिजाइन किया गया था और यह पहला खेल था जो माउस के सहारे खेला जाता था। यानी इसमें शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता था। इस खेल ने उस समय के सारे रिकाॅर्ड तोड़ दिए। फिर बच्चों को सीख देने के उद्देश्य से कंप्यूटर कंपनियों ने ऐसे खेल बनाने शुरू कर दिए जिसमें मनोरंजन तो होता ही था, साथ ही ज्ञान भी बढ़ता था।

1991 के बाद जब इंटरनेट की लोकप्रियता बढ़ने लगी तब कंप्यूटर कंपनियों ने और विकसित खेल तैयार किए। एलियन अटैक, एलियन क्लोन्स, बैंड एपल, बेकहम, केनयान ग्लाइडर, पानसिंग ब्लेयर, बूम जैसे खेल तैयार किए गए। 1996 के बाद इंटरनेट देखने वालों की संख्या जब तेजी से बढ़ी तब इन कंपनियों ने कला, एनिमेशन का प्रयोग करना शुरू कर दिया। खेलों को और रोचक बनाने के लिए कंप्यूटर कंपनियों ने अब आवाज के साथ-साथ ग्राॅफिक्स और मल्टीमीडिया गेम की भी शुरुआत की।

 

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें