Benefits poisonous snakes in hindi: वैसे तो सांपों को लेकर बहुत सी जानकारियां आप आए दिन टीवी और समाचार पत्रों में पढ़ते ही रहते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सांपों के विष (Snake poison) का चिकित्सा जगत में बड़ा महत्व है। आपको जानकर शायद हैरानी हो मगर यह सच है। चिकित्सा जगत में सांपों के विष (Snake poison) से कई प्रकार की दवाईयां तैयार की जाती है। मगर विगत कुछ समय से ऐसे विषैले सांप की संख्‍या दिन-प्रतिदिन घट रही हैं जिनसे चिकित्सा कार्यों के लिए विष उपलब्ध होता है। खुलासा डॉट इन में हम आपको बता रहे हैं कि सांप से जुड़ी कुछ ऐसी ही रोचक जानकारी (Benefits poisonous snakes in hindi)

 

 

विषधर सांपों (Benefits poisonous Snakes) की संख्या होती है कम

वैज्ञानिकों का मानना है कि दर असल विषधर सापों (Poisonous snakes) की संख्‍या उन सापों की तुलना में बहुत कम है जिनमें विष होता ही नहीं। ये कुल सांपों के अध्ययन और उनसे विष हासिल करने के लिए विशेष प्रतिष्ठानों में सर्पशालाएं बनायी गयी हैं। जिनमें विभिन्न प्रकार के सांपों से प्रजनन और विकास के लिए अनुकूल स्थितियां उपलब्ध कराई गयी है।

संसार में पाए जाते हैं करीब 2500 किस्म के Snakes

दुनिया में सांपों (Snakes) की लगभग 2500 किस्में पायी जाती हैं लेकिन न्यूजीलैंड तथा आइलैंड में सांप बिल्कुल नहीं पाए जाते। विश्व स्वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में लगभग 30 से 40 हजार व्‍यक्ति प्रतिवर्ष जहरीले सांपों के काटने से मर जाते हैं।

हमारे देश में यह संख्‍या 12 हजार प्रतिवर्ष है। हमारे यहां जहरीले सापों में नाग (कोबरा), करैत, वाइपर आदि मुख्‍य हैं। इनके अलावा कैलिपीफिस नामक विषधर सांप हिमालय क्षेत्र, सिक्कम, असम तथा म्यांमार में पाया जाता है। सांपों के बारे में और रोचक जानकारी पढ़ने के लिए पढ़ें हमारी पोस्ट सांपों के बारे में अजीबोगरीब जानकारी जो आपको हैरान कर देगी।

Viper के जहर की पांच बूंदे ही होती हैं आदमी के लिए प्राणघातक

विशेषज्ञों का मानना है कि वाइपर सांप (Viper Snakes) के जहर की 5 बूंदें तथा नाग की 3 बूंदें एक स्वस्थ मनुष्य के लिए प्राणघातक होती है जबकि समुद्री सर्प की एक बूंद ही पांच स्वस्थ मनुष्यों की जीवन लीला समाप्‍त कर सकती है। दुनिया के सर्वाधिक 10 विषैले सांपों में से आस्ट्रेलिया का `पीस स्नेक´ भी है जो अगर एक बार डस दे तो उसके द्वारा छोड़े गए विष की मात्रा 100 आदमियों को मारने के लिए काफी है।

दो मुख्य एंजाइमों का मिश्रण होता है सांप का जहर (Snakes Poisons)

आम तौर पर जहरीले सांपों के सिर व आंख के पिछले भाग में एक जोड़ी विष ग्रथियां होती हैं। जो विष का निर्माण करती हैं इन्हीं में एक विष नलिका दांतों में खुलती है। ये विष दांत मुड़े हुए तथा मांसल खोल में ढके रहते हैं। विष दांत के माध्यम से ही विष शिकार के शरीर में घुसता है। सांप का विष दो मुख्‍य एंजाइमों का जटिल मिश्रण होता है। पहला- हिमोर्टाज्सन रक्त कोशिकाओं रक्त कणिकाओं तथा ऊतकों को नष्ट करके आंतरिक रक्त स्प्राम को बंद कर देता है। दूसरा- न्यूरोहाज्सन केंद्रीय तं‍त्रिकातंत्र को प्रभावित कर श्वासन क्रिया तथा दिल की गतिविधियों में अवरोध उत्पन्न कर देता है। इन दोनों एंजाइमों के अतिरिक्त विष में `हारलुराडाइनेस´ भी मौजूद होता है जिससे विष बहुत तेजी से पूरे शरीर में पहुंच जाता है।

विभिन्न् दवाओं में होता है विष का प्रयोग

चिकित्सा के लिए सांप का विष प्राप्‍त करने हेतु सर्प विशेषज्ञों की लंबी यात्राएं करनी पड़ती हैं। पकड़े गए सांपों को पहले सर्पशालाओं में भेज दिया जाता है। बाद में प्रत्येक सर्प से बारी-बारी से विष छोड़न विधि से विष निकाला जाता है। जिसस वे विष नलिकाओं से होता हुआ विष-दंत में चला जाता है और फिर पात्र में गिरता है। इस प्रक्रिया में सांप का सारा जहर बाहर आ जाता है और सांप मरा हुआ-सा हो जाता है। सांप को धूप में कुछ देर रखने के बाद ये फिर सक्रिय हो जोते हैं। बाद में इस विष को ऐसे प्रतिष्‍ठानों या प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है जो सांप के जहर से दवाएं बनाते है। साइटिका होमोकोलिया आदि अनेक बीमारियों के उपचार में इससे बनी दवाएं रामबाण का काम करती हैं। कुछ वैज्ञानिकों ने कुष्ठ रोग तथा कैंसर के उपचार में भी सर्प-विष को गुणकारी पाया है।

 

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