• संसार में अब तक करीब 70 हजार लोगों कोरोनावायरस के शिकार हो चुके हैं।
  • समस्त विश्व भर में कोरोनावायरस से अब तक करीब 1600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
  • चीन के शोधकर्ताओं ने माना कि कोरानावायरस पैंगेलिन से चमगादड़ और फिर इंसान में पहुंचा

अभी तक कोरोना वायरस (Corona Virus) एक रहस्य बना हुआ है जहाँ अभी तक यह साबित नहीं हो सका है कि यह वायरस चमगादड़ से फैला या दूसरे जीव से वहीँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अन्य कई रिसर्च इसकी ओर इशारा कर रही हैं। डब्ल्यूएचओ (WHO) ने मंशा जताई है कि सबूतों की संख्या बढ़ रही है जो चमगादड़ में कोरोना वायरस होने की पुष्टि कर रहे हैं ।

एक सवाल यह भी बनता है कि दुनियाभर में ज्यादातर वायरस चमगादड़ से ही क्यों फैल रहे हैं जैसे कि भारत में निपाह, दूसरे देशों में इबोला और रैबीज के मामलों में चमगादड़ के नाम को ही ज़ाहिर किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस का नया आधिकारिक नाम कोविड-19 रखा है जिसका अर्थ है कोरोना वायरस (Corona Virus) डिजीज है जबकि चीन के हेल्थ कमीशन ने 8 फरवरी को कोरोना वायरस का नाम बदलकर नोवेल कोरोनावायरस (Corona Virus) निमोनिया (एनसीपी) रखा ।

स्कॉट वीज जो कि अमेरिका के ऑन्टेरियो वेटरनेरी कॉलेज के प्रोफेसर है, के अनुसार कोरोना वायरस (Corona Virus) का चमगादड़ से कनेक्शन होना सच हो सकता है परन्तु इंसानों तक इसका पहुंचना अभी तक राज है जबकि चीनी वैज्ञानिकों ने पैंगोलिन से चमगादड़ और फिर चमगादड़ से इंसान में वायरस पहुंचने की पुष्टि की हो परन्तु अब तक यह बात प्रमाणित नहीं हो पायी है।

हालाँकि वुहान में अब तक चमगादड़ और सांप को कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण की वजह बताया जा रहा था परन्तु  चीनी वैज्ञानिकों के नए खुलासे ने सबको चौका दिया है क्योंकि उन्होंने पैंगोलिन को इसका जिम्मेदार ठहराया है।

शोधकर्ता शेन योंगी और जिओ लिहुआ के अनुसार यह वायरस पैंगोलिन से चमगादड़ और इससे इंसान में पहुंचा है जिसे समझने के लिए 1 हजार जंगली जानवरों के सेंपल लिए गए थे जो कि मरीजों से लिए गए सैंपल में मौजूद कोनोरा वायरस (Corona Virus) और पैंगोलिन का जीनोम सिक्वेंस (आनुवांशिक अनुक्रम) 99 फीसदी तक समान पाए गये । हालाँकि डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार इंसान सीधी तौर पर कभी भी चमगादड़ के संपर्क में नहीं आ सकते  इसलिए इसका पता लगाना अतिआवश्यक है।

डॉ समीरा मुबारेका जो कि टोरंटो हेल्थ साइंस सेंटर की माइक्रोबायोलॉजिस्ट है, के अनुसार ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब इंसानों में किसी बीमारी की वजह के रूप में चमगादड़ का नाम सामने आया हो और यह कई तरह का वायरस का वाहक होता है जो कि पहले भी साबित हो चुका है। इतना ही नहीं चमगादड़ की कई प्रजातियां रेबीज और निपाह वायरस की वाहक रही हैं।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस (Corona Virus) एक खास किस्म के वायरस का समूह है जो विशेषतौर पर जानवरों में पाया जाता है, जिसे जूनोटिक भी कहा जाता हैं, जिससे तात्पर्य है दुर्लभ स्थिति में जानवरों से निकलकर इंसानों को संक्रमित करने में सक्षम । ऐसे भी कोरोना वायरस (Corona Virus) है जो इंसानों के लिए काफी खतरनाक माने जाते हैं। जैसे मिडिल ईस्ट रेस्पिरेट्री सिंड्रोम (MERS) के कारण बनने वाला मेर्स वायरस और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री वायरस (सार्स)। सरल शब्दों में कहें तो सार्स भी एक तरह का कोरोना वायरस है परन्तु नया वायरस ज्यादा खतरनाक है।

50 साल से अधिक समय से चमगादड़ पर रिसर्च कर रहे वेस्टर्न ऑन्टेरियो युनिवर्सिटी के प्रो ब्रॉक फेंटॉन के अनुसार चमगादड़ एक ऐसा जीव है जिसमे एक समय में कई वायरस हो सकते हैं। यह उसकी खासियत है कि ये वायरस उसे संक्रमित नहीं कर पाते। प्रोफेसर स्टीफन लुबी पिछले 12 साल से निपाह वायरस पर रिसर्च कर रहे हैं जिनके अनुसार एक विशेष प्रकार की एंटीबॉडीज चमगादड़ के शरीर में पाई जाती हैं जिसके चलते कोई भी वायरस चमगादड़ को प्रभावित नहीं कर पाता और वायरस चमगादड़ के शरीर में सुप्त अवस्था में पड़ा रहता है, जिसे शेडिंग कहते हैं। परन्तु जिस समय चमगादड़ कोई फल या ताड़ी आदि का सेवन कर रहा होता है तो यह वायरस चमगादड़ से उन चीजों में प्रसारित हो जाता है।

इतना ही नहीं ये वायरस चमगादड़ के मल-मूत्र द्वारा भी दूसरे जीवों विशेषकर स्तनाधारियों को संक्रमित करने में सक्षम होते है जिसके चलते अजीब तरह का बुखार और समय पर पहचान न होने पर मृत्यु तक हो सकती है । इससे पहले भी 2002 में चमगादड़ से फैले सार्स से दुनियाभर में 774 मौते हुयी जो कि पहले चमगादड़ से बिल्ली और इससे इंसानों तक पहुंचा था । 2018 में केरल में निपाह वायरस का वाहक भी भारतीय फलभक्षी चमगादड़ ही था जिसके कारण 17 मौतें हुई थीं। इतना ही नहीं इबोला, रैबीज, हेंद्र और मारबर्ग वायरस के मामलों में भी वाहक चमगादड़ ही था।

चूँकि चीन की जलवायु और जैव-विविधता के चलते यहाँ चमगादड़ की कई प्रजाति पाई जाती हैं। यहां बढती आबादी के कारण तेजी से जंगलों को काटा जा रहे है जिसके चलते वो इंसानों के करीब पहुंच रहे हैं और जिसके कारण संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं चीन में चमगादड़ और सांप जैसे जीवों का मांस और सूप पीने का भी चलन भी है। मामलों के बढ़ने की एक वजह ये भी है।

 

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