Auraiya, 20 अक्टूबर (एजेंसी)। जनपद के बाबरपुर कस्बे के बृन्दावन गॉर्डन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को आचार्य सुशील शुक्ल ने भगवान बावन अवतार के जन्म की कथा का मनोहारी वर्णन किया।

कथा में विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित से शुकदेव कहते हैं, कि संसार का कल्याण करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं तथा जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब सज्जनों का कल्याण और राक्षसों का वध करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं, लेकिन कभी-कभी भगवान, भक्त को दिए गए बचन को पूरा करने के लिए रूप बदलकर पृथ्वी पर आते हैं।

बावन भगवान के मनोहर झांकी का वर्णन करते हुए कहा कि बावन अंगुल के हैं , हाथ में कमंडल, गले में जनेव धारण किये पांव में खड़ाऊ पहने चले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजा बलि ने जब बड़ा दानवीर बनने लगा तो उसका मोह भंग करने के लिये सिर्फ तीन पग पृथ्वी मांगी, जिसमें पूरी पृथ्वी को नाप दिया। आचार्य ने चौपाई पर आज के परिवेश से समाज को दिशा देकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

उन्होंने कहा लोगों को सत्संग करना चाहिए। उन्होंने बताया अपने अंदर बुराई विद्यमान न रहे, इसके लिए संत पुरुषों को सत्संग का मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहाकि भगवान श्रीराम की मर्यादा और श्रीकृष्ण को तब समझोगे जब राममय बनोगे। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। वही रात्रि के समय होने वाली सीता शरण महाराज की राम कथा सुनने वालों की भी भीड़ उमड़ रही है।

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