• भक्त हनुमान की पूजा करने पर लोगों को कार्यों में सफलता मिलती है
  • सूर्यमुखी हनुमान की आराधना से ज्ञान और कार्यों में गति भी प्राप्त होती है
  • वीर हनुमान स्वरूप की पूजा मात्र से आत्मविश्वास चेहरे पर नजर आता है
  • दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा की पूजा करने पर मृत्यु, भय और चिंताएं समाप्त होती हैं
  • सेवक हनुमान की पूजा करने पर समर्पण की भावना जागृत होती है

New Delhi 09 जून (एजेंसी) कहते हैं कलियुग में समस्त दुखों का नाश महज हनुमानजी की आराधना से हो जाता है। बैकुंठ जाते वक्त मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने परम भक्त हनुमान को इसी उद्देश्य से धरती पर रहने का आदेश दिया था। ऐसी मान्यता है कि कलियुग में हनुमानजी की पूजा से न सिर्फ घर की बाधा दूर होती है, बल्कि बिगड़े काम भी बन जाते हैं। हम आपको हनुमानजी की उपासना से जुड़ी कुछ अहम बातें बता रहे हैं। विद्वानों के अनुसार, हनुमानजी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने पर अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है। जानिए हनुमानजी के विभिन्न स्वरूप और उनकी पूजा से मिलने वाले शुभ फल और उनके लाभ।

सेवक हनुमान

हनुमानजी के इस स्वरूप की पूजा करने पर परिवार और कार्य स्थल पर सभी बड़ों का विशेष स्नेह प्राप्त होता है। सेवक हनुमान के स्वरूप में भगवान राम के चरणों में हनुमानजी बैठे हुए हैं और श्रीराम उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। इस स्वरूप की पूजा करने पर मन में कार्य और रिश्तों के प्रति सेवा और समर्पण की भावना जागृत होती है।

भक्त हनुमान

भक्त हनुमान स्वरूप में हनुमानजी श्रीराम की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। इस स्वरूप की पूजा करने पर लोगों को कार्यों में सफलता मिलती है, साथ ही एकाग्रता और शक्ति प्राप्त होती है।

सूर्यमुखी हनुमान

विद्या, मान-सम्मान और उन्नति की चाहत अगर आप रखते हैं तो प्रतिदिन सूर्यमुखी हनुमानजी की उपासना करें, क्योंकि सूर्यदेव को हनुमान जी का गुरू कहा जाता है। कहते हैं सूर्य, प्रकाश और गति के प्रतीक हैं। इस तरह सूर्यमुखी हनुमान की आराधना से ज्ञान और कार्यों में गति भी प्राप्त होती है।

वीर हनुमान

नाम के अनुरूप हनुमानजी के इस स्वरूप की उपासना करने से बल, पराक्रम और साहस की प्राप्ति होती है। वीर हनुमान स्वरूप की पूजा मात्र से आत्मविश्वास चेहरे पर नजर आता है। साथ ही आपके साहस के आगे शत्रु नतमस्तक हो जाएंगे।

दक्षिणमुखी हनुमान

दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा की पूजा करने पर मृत्यु, भय और चिंताएं समाप्त होती हैं। हनुमानजी की जिस प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है, उसकी पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रह जाता है। ऐसा माना जाता है कि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है। हनुमानजी शिवजी के अवतार माने जाते हैं, जो काल के नियंत्रक हैं।

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