Most Beautiful Churches in Russia : यूं तो रूस (Russia) में बहुत से ऐसे पर्यटन स्थल हैं जहां हर वर्ष देश विदेश से लाखों लोग जाते हैं, लेकिन रूस के चर्च (Russia Churches) और पूजा घरों की बात ही कुछ निराली है। देश विदेश से आए रूस घूमने आए दर्शकों इन पूजा घरों को देखकर आश्चर्य से भर जाते हैं, अद्भुत वास्तुशिल्प के इन नमूनों को देखने के लिए देश विदेशें से लाखों की संख्या में पर्यटक हर वर्ष रूस (Russia) पहुंचते हैं।

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सुनहरे गुम्बद वाले पूजास्थलों में विख्यात है कजान (Kazan in Russia) का सर्वधर्म मंदिर

रूस लकड़ी की वास्तुकला और सुनहरे गुम्बद वाले पूजास्थलो के लिए पुरे विश्व में विख्यात है | इन पूजास्थलो  में सबसे ज्यादा आकर्षक कज़ान का सर्वधर्म मन्दिर (Kazan in Russia) है | मंदिर की गुम्बदों पर ईसाइयों की सलीब के साथ-साथ इस्लाम धर्म (Islam)  के प्रतीक चाँद और तारा भी लगे हुए है तथा इस मंदिर में एक साथ विभिन्न धर्मो के लोग एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं, इसी वजह से इस मन्दिर में किसी विशेष धर्म की कोई पूजा या प्रार्थना नहीं होती और यही कारण है कि इस मंदिर को कज़ान का सर्वधर्म मन्दिर (Kazann) कहते है | विश्व से धार्मिक-संघर्ष ख़त्म करने  तथा  ईश्वर एक है का सन्देश देने हेतु इस मंदिर को कज़ान नगर के मानवतावादी कलाकार इलदार ख़ानफ़ ने बनवाया था | सन् 2013 में इलदार ख़ानफ़ की मृत्यु के पश्चात इस मन्दिर को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ में इजाफ़ा हुआ है । लोगों द्वारा दिए जाने वाले दान व चन्दे से इस मन्दिर का निर्माण कार्य आज भी चल रहा है ।

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बीकवा गोथिक शैली में बना है व्लदीमिरस्की गिरजा

व्लदीमिरस्की गिरजा, बीकवा गोथिक शैली में बनी एक ऐसी दो मंज़िला महलनुमा इमारत जो कहीं से भी देखने में साधारण गिरजे की तरह नहीं दिखती है | यह गिरजा मास्को से 40 किलोमीटर दूर बीकवा गाँव में स्थित है |  इसका निर्माण रूसी सेना के जनरल मिख़ाइल इज़माइलफ़ ने करवाया था तथा इस इमारत को बनाने का ठेका वास्तुकार वसीली बझेनफ़ ने लिया था। कहते है कि इससे पहले रूस के साम्राज्ञी येकतिरीना द्वितीया ने भी  मास्को के सरेसीना के इलाके में बझेनफ़ ने एक महल का निर्माण करवाया था, जिसे देखकर साम्राज्ञी बेहद नाराज़ हो गयी थी और गिरजा को नष्ट करवा दिया था ।

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1703 में राजा बरीस गलीत्सिन ने कराया था मां मरियम के गिरजाघर का निमार्ण

माँ मरियम के गिरजाघर का राजा बरीस गलीत्सिन ने 1703 में मास्को शहर से साठ किलोमीटर दूर स्थित अपनी एक जागीर दुब्रोवित्सी में इसका निर्माण करवाया था | देखने में ये गिरजाघर किसी राजा के मुकुट के समान लगता है| राजा बरीस  ने रूस के भावी ज़ार प्योतर का प्रथम का पालन पोषण किया था | जिस वर्ष रूस में प्योतर प्रथम ने सेण्ट पीटर्सबर्ग शहर की स्थापना की थी ठीक उसी वर्ष राजा बरीस गलीत्सिन ने इस गिरजाघर की स्थापना की थी |

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कस्तमरोव्स्की साध्वी गुफ़ा मठ

आज भी ये चर्चा का विषय है कि कच्ची चट्टानों को खोदकर उनके बीच इस गुफ़ानुमा मठ, जिसे कस्तमरोव्स्की साध्वी गुफ़ा मठ के नाम से जाना जाता है, का निर्माण किसने किया होगा। यह स्थान मास्को से 800 किलोमीटर दूर वरोनिझ प्रदेश में है | आज तक कोई नही जान पाया कि इसका निर्माण 17वीं सदी के स्थानीय ईसाई भिक्षुओं ने किया या फिर 8वीं सदी में बाइजेण्टाइन से भागकर आए दैवचित्र विरोधी साधुओं ने किया । आधुनिक रूस में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार का एक सबसे प्राचीन केन्द्र माना जाता है। 1917 की समाजवादी क्रान्ति के बाद इस मठ को बन्द कर दिया गया तथा इसमें रहने वाले बहुत से पुराने भिक्षुक दूसरी गुफ़ाओं में जाकर रहने लगे। 1942-43 में दूसरे महायुद्ध की लड़ाइयों इसी क्षेत्र में हुयी और फ़ासिस्ट जर्मनी की फ़ौज ने कब्ज़ा कर लिया। 1997 में एक बार इस मठ को फिर से चालू किया गया ।

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त्रिदेव चर्च की विलक्षण इमारत तैयार कराई थी अलिक्सान्दर ने

राजा अलिक्सान्दर व्याज़िम्स्की ने 18वीं सदी में एक त्रिदेव चर्च की एक विलक्षण इमारत बनवाई जिसका  डिजाइन ख़ुद अलिक्सान्दर ने तैयार किया था । रूसी पकवानों से मिलते जुलते इसकी इमारत और उसके घण्टाघर हैं। ईस्टर के अवसर पर यहाँ पनीर और मक्खन से गोलाई लिया हुआ ईस्टर-केक बनाया जाता है जिसे रूस में कुलीच कहते हैं। ये दोनों इमारतें भी कुलीच के आकार की ही हैं।

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शहीद अनस्तसीया गिरिजा घर

क्रीमिया में कची-कल्योन गुफ़ा-नगर के पास पहाड़ों की ढलान में तश-आइर गुफ़ाओं में एक छोटा-सा गिरजाघर बना हुआ है, जिसे शहीद अनस्तसीया का गिरजा कहा जाता है, जो कि मास्को से 500 किलोमीटर दूर है । इस पहाड़ की तलहटी से ऊपर जाने के लिए मोटर-कारों के पुराने टायरों से एक पगडण्डी बनी हुई है। इस पगडण्डी पर 15 मिनट की चढ़ाई चढ़कर और कुछ झाड़ियों को पार करके आप तश-आइर गुफ़ाओं तक पहुँच जाएँगे, जहाँ यह विचित्र गिरजाघर बना हुआ है।

 

 

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